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Bastar Malaria Control Fund: बस्तर में मलेरिया से बचाव के लिए मिले 68 करोड़, फंड होने के बावजूद मेडिकेटेड मच्छरदानी खरीदने में लापरवाही; कांकेर में हो चुकी है बच्चों की मौत
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Bastar Malaria Control Fund: बस्तर में मलेरिया से बचाव के लिए मिले 68 करोड़, फंड होने के बावजूद मेडिकेटेड मच्छरदानी खरीदने में लापरवाही; कांकेर में हो चुकी है बच्चों की मौत

Samachar Cafe Desk 23 October 2026
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बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में मलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव और नियंत्रण के लिए पैसों की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और खरीदी प्रक्रिया में हो रही भारी देरी के चलते ग्रामीणों की जान खतरे में पड़ गई है। केंद्र सरकार की ओर से 68 करोड़ रुपये मिलने के दो महीने बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों तक मच्छरों से बचाने वाली 'मेडिकेटेड मच्छरदानियां' नहीं पहुँच पाई हैं।  

CGMSC की लचर कार्यशैली से अटका वितरण

मलेरिया नियंत्रण अभियान का 14वां चरण चल रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन (CGMSC) द्वारा अब तक निविदा (टेंडर) के दस्तावेज तक तैयार नहीं किए गए हैं। आलम यह है कि बारिश के मौसम में, जब मच्छरों का प्रकोप सबसे ज्यादा होता है और संक्रमण फैलने का खतरा चरम पर रहता है, तब भी पर्याप्त फंड होने के बावजूद मच्छरदानियों की खरीदी नहीं की जा सकी है।

कांकेर में जा चुकी है बच्चों की जान

बस्तर संभाग में इस साल अब तक 8,4260 लोग मलेरिया की चपेट में आ चुके हैं। खासकर कांकेर जिले में जुलाई महीने के दौरान महज 10 दिन के भीतर तीन स्कूली बच्चों की दर्दनाक मौत ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की पोल खोल दी थी। बच्चों की इस तरह हुई मौत के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी बेहद गंभीरता से लिया था और मुख्य सचिव तथा स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी किया था। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की नींद नहीं खुल रही है और कागजी प्रक्रिया के नाम पर आदिम अंचलों के लोगों को भगवान भरोसे छोड़ा जा रहा है।