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Muria Darbar Jagdalpur: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित पारंपरिक 'मुरिया दरबार' में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपरागत सामाजिक व्यवस्था और सामूहिक निर्णय प्रणाली की पुरजोर सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समाज की परंपरागत व्यवस्था सामाजिक एकता, न्याय, आपसी सहयोग और सुशासन का एक बेहतरीन उदाहरण है।
“मैं भी एक मांझी की बेटी हूँ”
मुरिया दरबार में उपस्थित आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और पारंपरिक प्रमुखों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को साझा किया। उन्होंने भावुक होकर कहा, "मैं भी इसी आदिवासी संस्कृति और परंपरा से आती हूँ। मेरे दादाजी मांझी थे, मेरे पिताजी भी मांझी थे और मेरे भाई भी मांझी हुआ करते थे। मैं एक मांझी की बेटी हूँ, गाँव के मुखिया की बेटी हूँ।" उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति उनका जुड़ाव आज भी उतना ही गहरा है।
मुरिया दरबार और पारंपरिक न्याय व्यवस्था की सराहना
राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक न्याय व्यवस्था में जहाँ थानों और अदालतों के चक्कर काटने में दशकों लग जाते हैं, वहीं आदिवासी समाज में 'माँझी' और पारंपरिक प्रमुख आपसी बातचीत, सहमति और भाईचारे के आधार पर विवादों का बहुत आसानी से समाधान कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने अपने अलिखित संविधान और सामाजिक नियमों को पीढ़ियों से जीवंत रखा है, जो समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का मुख्य आधार है।
शिक्षा, विकास और संस्कृति का समन्वय
राष्ट्रपति ने समाज के लोगों से बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर देने का आग्रह करते हुए कहा कि बदलते वक्त के साथ आगे बढ़ना और विकास के नए अवसरों को अपनाना जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ अपनी संस्कृति को छोड़ना नहीं है। विकास और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित बस्तर दशहरा समिति के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।