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रायपुर: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज रायपुर, छत्तीसगढ़ में 'नुआखाई महोत्सव' के अवसर पर आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व’ और ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान उन्होंने समारोह को संबोधित करते हुए कृषि संस्कृति, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया।
प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और अन्न का सम्मान
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि नुआखाई मिलन समारोह केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं है, बल्कि हमारी समृद्ध परंपराओं, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमारी प्राचीन कृषि परंपरा को संजोकर रखने और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि अन्न केवल भूख मिटाने का साधन नहीं, बल्कि किसानों के परिश्रम और धरती की उदारता का प्रतीक है। अन्न का सम्मान करना, किसानों के योगदान को स्वीकारना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सबका सामूहिक दायित्व है।
युवाओं को ऊंचे सपने देखने और ईमानदारी से काम करने की प्रेरणा
बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि परिस्थितियां और चुनौतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन प्रत्येक युवा के भीतर कुछ बेहतर करने की ललक होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे अपने सपनों को ऊंचा रखें, विचारों को व्यापक बनाएं और अपने मनोमस्तिष्क में राष्ट्र सेवा का भाव बनाए रखें। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का निर्माण केवल बड़े निर्णयों से नहीं, बल्कि करोड़ों नागरिकों के छोटे-छोटे ईमानदार प्रयासों से होता है। ज्ञान के साथ विनम्रता और महत्वाकांक्षा के साथ नैतिकता जैसे गुण ही 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करेंगे।
महिला सशक्तिकरण और विकसित भारत का संकल्प
समारोह में महिलाओं की भारी भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को पाने के लिए महिलाओं की समान भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने युवाओं और पुरुषों से आग्रह किया कि वे अपनी बहनों-बेटियों को ऐसा सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण दें, जिससे वे बिना किसी रुकावट के अपने सपनों को पूरा कर सकें। महिलाओं के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे दैनिक आचरण में दिखना चाहिए।
नक्सलवाद छोड़ मुख्यधारा में लौटे युवाओं की सराहना
राष्ट्रपति ने इस बात पर विशेष प्रसन्नता जताई कि केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों तथा युवाओं की दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर छत्तीसगढ़ के युवा अब नक्सलवाद के भटकाव से मुक्त होकर मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। जहाँ कभी आतंक का साया था, वहाँ आज विकास का उजियारा फैल रहा है। इस बदलाव से न केवल परिवारों का कल्याण हो रहा है, बल्कि देश के विकास को भी नई गति मिल रही है।