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Bastar Dussehra: विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा के पावन अवसर पर 618 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए मां दंतेश्वरी की पावन डोली और छत्र रविवार को अष्टमी के दिन दंतेवाड़ा स्थित मुख्य मंदिर से जगदलपुर के लिए रवाना हो गए। इस पारंपरिक यात्रा के शुरू होने के साथ ही बस्तर के इस ऐतिहासिक और अनूठे दशहरा पर्व का मुख्य चरण आरंभ हो गया है, जिसे देखने और इसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
दंतेवाड़ा से मां की डोली की विदाई के दौरान एक अत्यंत भावुक और भक्तिमय माहौल देखने को मिला। जिया परिवार के सदस्यों और पुजारियों ने पूरी परंपरा और विधि-विधान के साथ मां दंतेश्वरी की डोली को अपने कंधों पर उठाया। डोली के प्रस्थान के समय दंतेवाड़ा के डंकिनी पुल तक श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। सड़क के दोनों किनारों पर हजारों की संख्या में लोग माता के दर्शन के लिए कतारबद्ध खड़े नजर आए।
इस दौरान पूरा क्षेत्र माता के जयकारों से गूंज उठा और हर किसी की आंखें इस ऐतिहासिक और दुर्लभ पल की साक्षी बनने पर धन्य महसूस कर रही थीं। बस्तर दशहरा अपनी अनूठी सांस्कृतिक और पारंपरिक मान्यताओं के लिए पूरी दुनिया में विशेष स्थान रखता है। 75 दिनों तक चलने वाले इस विश्वप्रसिद्ध पर्व में मां दंतेश्वरी की डोली का जगदलपुर पहुंचना और विभिन्न रस्मों का निभाया जाना इस आयोजन का सबसे मुख्य आकर्षण माना जाता है।
डोली के जगदलपुर पहुंचने पर भव्य स्वागत की तैयारियां की गई हैं, जहां हजारों भक्त माता का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। जिला प्रशासन और दशहरा समिति द्वारा सुरक्षा एवं व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस प्राचीन परंपरा के जरिए बस्तर की संस्कृति और आस्था का जीवंत स्वरूप एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने आ रहा है।