अपनी पसंद की खबर खोजें
रायपुर, 24 सितंबर 2026। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ केवल सुविधाओं और अधोसंरचना का विस्तार नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और बच्चों को पोषण, शिक्षा व सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने से है। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ जनभागीदारी के माध्यम से महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं एवं सेवाओं को जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
महिलाओं का आत्मविश्वास बनेगा परिवार की ताकत
लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं परिवार और समाज के साथ आर्थिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से अनेक महिलाओं को घरेलू जरूरतों और परिवार से जुड़े निर्णयों में सहयोग मिला है। वहीं स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाएं बचत, कौशल विकास और छोटे उद्यमों से जुड़ रही हैं।
आंगनवाड़ी से जुड़ेंगे परिवार और समुदाय
उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज की नींव बचपन में पड़ती है। आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा के साथ माताओं को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसके माध्यम से अभिभावकों और समुदाय को आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों से जोड़ने, बच्चों के भोजन, स्वच्छता और पोषण पर संवाद करने का अवसर मिलेगा।
मंत्री ने कहा कि पोषण केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। बच्चों को उम्र के अनुसार पर्याप्त और विविध आहार मिले, उनकी वृद्धि पर नजर रखी जाए और परिवार उनकी देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाए, यह सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘बच्चों की थाली, हम सबकी जिम्मेदारी’ का संदेश इसी सोच को हर घर तक पहुंचाने का प्रयास है।
सुरक्षित बचपन के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
उन्होंने कहा कि बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा और उपेक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए परिवार, विद्यालय, पंचायत, आंगनवाड़ी और समुदाय को मिलकर काम करना होगा। बच्चों की बात सुनना, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता उपलब्ध कराना सुरक्षित बचपन के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ का उद्देश्य लोगों तक पहुंचकर उनकी जरूरतों को समझना और योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाना है। परिवार, समुदाय और शासन की साझा भागीदारी से ही सशक्त मातृशक्ति तथा सुपोषित और सुरक्षित बचपन के संकल्प को मजबूत करते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की नींव तैयार की जा सकती है।