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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के सुदूर जनजातीय अंचलों की बेटियों और महाविद्यालयीन विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में दक्ष बनाने तथा उनके संप्रेषण कौशल को मजबूत करने के लिए एक विशेष पहल की गई है। उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर में अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी संवाद कौशल विकास हेतु एक संभाग स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस संभाग स्तरीय कार्यशाला में बिलासपुर संभाग के विभिन्न महाविद्यालयों से आए 25 प्राचार्यों, 47 प्राध्यापकों और अन्य 17 प्रतिभागियों सहित कुल 89 शिक्षाविदों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम की शुरुआत में शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं बिलासपुर संभाग के अपर संचालक द्वारा कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। उन्होंने इसे उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्द्धन और समावेशी विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने छात्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में छात्राओं की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यदि आवश्यकता पड़े, तो रविवार व अन्य अवकाश के दिनों में भी विशेष शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं, जिसके लिए नियमानुसार प्रतिपूरक अवकाश की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा के प्रति झिझक दूर कर आत्मविश्वास विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में जानकारी दी गई कि छात्राओं के अंग्रेजी संप्रेषण कौशल को और अधिक निखारने के लिए 90 दिवसीय एक विशेष पाठ्यक्रम की अनुशंसा की गई है। इस पाठ्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों के महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए शुरू किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम मिलने की पूरी उम्मीद है। स्टेट कोऑर्डिनेटर ने इस 90 दिवसीय पाठ्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा, आधुनिक शिक्षण पद्धति और मॉड्यूल तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी साझा की।
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों और प्राध्यापकों को अंग्रेजी पढ़ाने की नई तकनीकों और संवाद कौशल को रोचक बनाने के तौर-तरीकों पर भी प्रशिक्षित किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में उच्च शिक्षा, बेहतर रोजगार और समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए अंग्रेजी भाषा में पकड़ होना बहुत जरूरी है, और यह पहल इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने सुझाव साझा किए और इस योजना को अपने-अपने महाविद्यालयों में पूरी निष्ठा के साथ लागू करने का संकल्प लिया। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल शिक्षकों को नई दिशा मिलती है, बल्कि सुदूर अंचल के विद्यार्थियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बेहतरीन मंच प्राप्त होता है।