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Raipur: छत्तीसगढ़ में मौसम के अचानक बदले मिजाज और चक्रवाती तूफान के खतरे ने अन्नदाताओं की नींद उड़ा दी है। राज्य में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान करीब 36 से 40 लाख हेक्टेयर (लगभग 90 लाख से 1 करोड़ एकड़) भूमि पर धान की फसल लहलहा रही है। मौसम की इस बेरुखी ने किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं।
फसलों के गिरने और दाने काले पड़ने का अंदेशा
राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में अभी धान की कटाई पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई है, ऐसे में लगातार हो रही बारिश और चक्रवाती तूफान के अनुमान ने किसानों को चितिंत कर दिया है। खेतों में पानी भरने से पकी हुई फसल के जमीन पर गिरने (लॉजिंग) की आशंका बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन खेतों में उन्नत और हाइब्रिड किस्मों की फसलें हैं—जहाँ किसान प्रति एकड़ 21 से 30 क्विंटल तक बंपर उपज की उम्मीद कर रहे थे—वहाँ जलभराव के कारण धान के पौधे गिरने और बालियों के दाने काले पड़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ और खेतों से पानी की निकासी नहीं हुई, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।