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जगदलपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया गया है। क्षेत्र में नक्सलवाद के कमजोर पड़ने और शांति बहाل होने की स्थिति को देखते हुए राज्य शासन ने बस्तर के 116 राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा श्रेणी में कटौती कर दी है। इस फेरबदल के दायरे में सत्ता पक्ष (भाजपा) और विपक्ष (कांग्रेस) दोनों दलों के कई दिग्गज नेता शामिल हैं।
किन बड़े नेताओं की घटी सुरक्षा?
गृह विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भाजपा और कांग्रेस के 9 प्रमुख नेताओं की Z+ सुरक्षा को घटाकर Z श्रेणी कर दिया गया है। इसके अलावा बस्तर के सांसदों, विधायकों और पूर्व मंत्रियों की सुरक्षा का भी नए सिरे से आकलन किया गया है। सुरक्षा में कटौती के दायरे में आने वाले प्रमुख नामों में शामिल हैं:
इसके अलावा Z श्रेणी वालों को Y+ और Y+ श्रेणी वालों को Y सुरक्षा में स्थानांतरित किया गया है। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा का यह निर्णय पिछले छह महीनों की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद लिया गया है, और आगामी समय में भी परिस्थितियों के अनुसार इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।
Z+ और Z सिक्योरिटी में कितना होता है अंतर?
सुरक्षा श्रेणियों में बदलाव के बाद यह जानना महत्वपूर्ण है कि Z+ और Z सुरक्षा व्यवस्था में बुनियादी तौर पर क्या अंतर होता है और कितने जवानों का सुरक्षा घेरा मिलता है:
बदली परिस्थितियों में पुलिस संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल
एक दौर था जब बस्तर में झीरम घाटी कांड (महेंद्र कर्मा की शहादत) और भीमा मंडावी जैसे जनप्रतिनिधियों पर हुए हमलों ने पूरे राजनीतिक गलियारे को दहला दिया था। उस दौर में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम अनिवार्य थे। हालांकि, अब सशस्त्र नक्सलवाद के दायरे में आई भारी कमी और क्षेत्र में शांति लौटने के बाद शासन ने सुरक्षा में लगे हजारों जवानों को मुक्त कर उन्हें अन्य पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों में लगाने का निर्णय लिया है।