रायपुर, 2 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल पर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस प्रदर्शनी में जंगल और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति, ग्रामीण आजीविका और आत्मनिर्भरता की अनूठी झलक देखने को मिल रही है। आज वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने विभागीय स्टॉल का औचक निरीक्षण किया और वहां प्रदर्शित उत्पादों की जानकारी ली।
निरीक्षण और प्रदर्शनी की मुख्य बातें:
- चेंदरू द्वार बना विशेष आकर्षण: प्रदर्शनी का मुख्य द्वार इंद्रावती टाइगर रिजर्व (बीजापुर) के प्रसिद्ध 'चेंदरू द्वार' की तर्ज पर बनाया गया है, जो आदिवासी युवक चेंदरू और बाघ की मित्रता के जरिए मानव व वन्यजीव के सह-अस्तित्व को दर्शाता है।
- वन मंत्री ने चखे उत्पाद: मंत्री केदार कश्यप ने वनोपजों से बनी औषधियों, लहसुन से बनी दवाओं और कोदो से बने बिस्कुट का स्वाद चखा। साथ ही, नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर वन धन विकास केंद्रों से जुड़कर मुख्यधारा में लौटी आत्मसमर्पित महिलाओं से संवाद किया।
- 'संवरता छत्तीसगढ़' और वृक्षारोपण की उपलब्धि: प्रदर्शनी में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के तहत वर्ष 2024 में 3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में 3.55 करोड़ पौधे रोपे जाने की जानकारी दी गई है। किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 36,896 किसानों ने 62,441 एकड़ निजी भूमि पर 3.67 करोड़ पौधे लगाए हैं।
- बांस शिल्प और छत्तीसगढ़ हर्बल्स: स्टॉल पर बांस से बने घर, नाव, मछली, फूलदान जैसे आकर्षक उत्पाद और छत्तीसगढ़ हर्बल्स के तहत सफेद मूसली चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, एलोवेरा शैम्पू व महाभृंगराज तेल जैसे उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं।
- औषधीय पौधों से आय: औषधीय पादप बोर्ड की 'घर की बाड़ी में औषधीय पौधे' योजना के जरिए ग्रामीण महिलाओं को सिंगी और सतावर जैसे पौधे लगाकर सालाना 20 से 30 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय कमाने की जानकारी दी जा रही है।
राज्योत्सव में यह प्रदर्शनी वनों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं के आजीविका संवर्धन की बेहतरीन तस्वीर पेश कर रही है।