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Jagdalpur News: बाढ़ से बर्बाद किसान सड़क पर उतरे, कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी ट्रैक्टरों से जगदलपुर बंद करने की चेतावनी
छत्तीसगढ़

Jagdalpur News: बाढ़ से बर्बाद किसान सड़क पर उतरे, कलेक्ट्रेट का घेराव कर दी ट्रैक्टरों से जगदलपुर बंद करने की चेतावनी

Samachar Cafe Desk 15 October 2026
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जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में हाल ही में आई भीषण बाढ़ के कारण हुए भारी नुकसान से प्रभावित किसान अब सड़कों पर उतर आए हैं। मकान ढहने और हजारों एकड़ में खड़ी किसानों की फसलें बर्बाद होने के बाद मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। गुरुवार को हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने स्थानीय कांग्रेसजनों के साथ मिलकर शहर के प्रमुख मार्गों पर रैली निकाली, जमकर नारेबाजी की और अंततः कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर जमीन पर बैठ गए। इस बड़े प्रदर्शन में महिला, पुरुष और युवा सहित सभी वर्गों के लोग शामिल हुए।

प्रदर्शन के दौरान किसानों का आक्रोश साफ तौर पर देखने को मिला, जो अपने साथ खेतों से लाई गई बर्बाद फसल भी साथ लेकर पहुंचे थे ताकि प्रशासन और अधिकारियों को नुकसान की वास्तविक तस्वीर दिखाई जा सके। किसानों का कहना है कि बाढ़ के कारण उनकी सालभर की मेहनत पानी में मिल गई है, लेकिन शासन-प्रशासन स्तर पर अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है। इसी उपेक्षा से नाराज होकर किसानों ने उग्र आंदोलन का रुख अपनाया है।

प्रदर्शन में शामिल रहे कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार बाढ़ प्रभावितों के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही किसानों की मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे ट्रैक्टरों के साथ पूरे जगदलपुर शहर को बंद करने के लिए बाध्य होंगे। किसानों की प्रमुख मांगों में प्रति एकड़ 65 हजार रुपये का कृषि मुआवजा देने की बात शामिल है।

इसके अलावा, बाढ़ में पूरी तरह ढह चुके कच्चे मकानों के लिए 3 लाख रुपये, पक्के मकानों के लिए 5 लाख रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1 लाख रुपये की सहायता राशि देने की मांग की गई है। किसानों ने यह भी मांग उठाई है कि बाढ़ के पानी में बह गए मवेशियों के लिए 60 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए और खेती के लिए बैंकों से लिए गए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण को पूरी तरह माफ किया जाए।

प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों की समस्याओं को सुना और ज्ञापन लिया, हालांकि किसानों ने दो टूक कह दिया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। बाढ़ पीड़ितों के समर्थन में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के लोग भी अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।

इस विरोध प्रदर्शन ने बस्तर में आपदा प्रबंधन और राहत वितरण कार्यों की पोल खोलकर रख दी है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और राहत राशि वितरित नहीं की, तो यह आंदोलन पूरे जिले में फैल सकता है। फिलहाल पुलिस प्रशासन भी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है ताकि कानून और व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।