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रायपुर। बस्तर के बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश को करीब से समझने के लिए दिल्ली से 43 इंफ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने नेतानार स्थित शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा पहुंचकर स्थानीय महिलाओं के लिए संचालित स्वरोजगार और प्रशिक्षण गतिविधियों को देखा।
महिलाओं के हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
नेतानार में महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सहित विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भ्रमण पर पहुंचे इंफ्लुएंसर्स ने प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से बातचीत कर उनके अनुभव और स्वरोजगार से जुड़े अवसरों की जानकारी ली।
प्रशिक्षण केंद्र में महिलाओं को अपने हुनर को रोजगार से जोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे परिवार की आय में योगदान देने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
वीर गुंडाधुर की विरासत से हुए परिचित
इंफ्लुएंसर्स ने नेतानार में वर्तमान गतिविधियों के साथ बस्तर के इतिहास और वीर गुंडाधुर के योगदान की जानकारी भी ली। ऐतिहासिक विरासत और मौजूदा स्वरोजगार गतिविधियों को एक साथ देखने से उन्हें बस्तर के सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों को समझने का अवसर मिला।
भ्रमण के दौरान स्थानीय लोगों से संवाद, महिलाओं की गतिविधियां और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी उनके अनुभव का हिस्सा रही।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करेंगे अनुभव
दिल्ली से आए 43 डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स अपने अनुभवों को सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा करेंगे। उनके कंटेंट में बस्तर की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहचान के साथ स्थानीय जीवन, ऐतिहासिक विरासत और महिलाओं की स्वरोजगार गतिविधियों को भी जगह मिलने की उम्मीद है।
प्रत्यक्ष भ्रमण के माध्यम से बस्तर को देखने का यह अनुभव उन लोगों तक क्षेत्र की विविध तस्वीर पहुंचाने में मदद कर सकता है, जिन्होंने अब तक बस्तर को सीमित संदर्भों में ही देखा है।
बस्तर की संस्कृति और विकास की तस्वीर
नेतानार का यह भ्रमण बस्तर की ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय संस्कृति और स्वरोजगार गतिविधियों को एक साथ सामने लाता है। महिलाओं के प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता की पहल के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहचान भी इस यात्रा का प्रमुख हिस्सा रही।