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रायपुर। छत्तीसगढ़ में साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत रविवार को बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान आकलन परीक्षा आयोजित की गई। प्रदेशभर में हुई इस परीक्षा में उम्र और सामाजिक परिस्थितियों की बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए करीब 1 लाख 70 हजार शिक्षार्थियों ने हिस्सा लिया।
परीक्षा का आयोजन प्रदेश के 20 हजार से अधिक गांवों और वार्डों में किया गया। बीजापुर जिले से सबसे अधिक 31,250 शिक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि कोरिया से 250 शिक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा के जरिए शिक्षार्थियों के बुनियादी पढ़ने, लिखने और संख्या ज्ञान का आकलन किया गया।
पूर्व माओवादियों ने थामी कलम
इस अभियान की खास तस्वीर बस्तर संभाग से सामने आई, जहां पुनर्वास की राह पर लौटे 821 पूर्व माओवादियों ने भी परीक्षा में भाग लिया। कभी हिंसा के रास्ते से जुड़े रहे इन लोगों ने अब शिक्षा और सामान्य जीवन की ओर कदम बढ़ाते हुए परीक्षा दी। यह पहल पुनर्वास के साथ शिक्षा को जोड़ने के प्रयास के रूप में सामने आई है।
शिक्षा से बदलाव की ओर कदम
उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे लोगों को बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान से जोड़ना है, जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए। रविवार को आयोजित आकलन परीक्षा में अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी ने शिक्षा के प्रति बढ़ती रुचि को सामने रखा।