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6 नवंबर 2026। दिवाली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन से हो जाती है। इस दिन जहां एक तरफ भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा का विधान है, वहीं शाम के समय यमराज के निमित्त दीपक जलाने की भी बेहद प्राचीन परंपरा है। इसे 'यम दीपक' (Yam Deepak) कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के लिए दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और परिवार पर आने वाली विपत्तियां टलती हैं।
धार्मिक नियमों के अनुसार, यम का दीपक जलाते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार यमराज से उनके दूतों ने पूछा कि क्या कभी किसी की अकाल मृत्यु पर आपको भी दया आती है? इस पर यमराज ने कथा सुनाई कि जिस घर में धनतेरस की शाम को यम के नाम का दीपक जलाया जाता है, वहां के लोगों की अकाल मृत्यु का संकट टल जाता है। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि परिवार की लंबी उम्र और आरोग्यता के लिए धनतेरस की रात मुख्य द्वार पर यमराज का दीपक जरूर प्रज्वलित किया जाता है।