अपनी पसंद की खबर खोजें
रायपुर, 10 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के दुर्गम वनांचलों में बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘स्कूल केईन्ता अभियान’ से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। भौगोलिक कठिनाइयों और स्कूलों की दूरी के कारण पहले जिन बच्चों के लिए नियमित पढ़ाई करना मुश्किल था, अब उन्हें अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। इस पहल के तहत अब तक 2,000 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। वहीं, अत्यंत दुर्गम और पहुंचविहीन क्षेत्रों में 34 नई वैकल्पिक प्राथमिक शालाएं शुरू की गई हैं, जिससे दूरस्थ गांवों के बच्चों के लिए पढ़ाई का रास्ता आसान हुआ है।
घमंडी के बच्चों को 10 किलोमीटर पैदल चलने से मिली मुक्ति
संकुल केंद्र गारपा के अंतर्गत आने वाले घमंडी गांव में इस अभियान का असर साफ दिखाई दे रहा है। पहले यहां के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए कोड़ेनार तक लगभग 10 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ता था। घने जंगलों, पथरीले रास्तों और लंबी दूरी के कारण बच्चों को नियमित रूप से स्कूल पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बच्चों और अभिभावकों की इस पुरानी समस्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने गांव में ही वैकल्पिक प्राथमिक शाला घमंडी शुरू की। वर्तमान में इस विद्यालय में 30 बच्चे पंजीकृत हैं। अब बच्चों को पढ़ाई के लिए लंबी और थकाऊ यात्रा नहीं करनी पड़ती तथा वे अपने गांव में ही शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
स्थानीय शिक्षा दूत निभा रहे अहम भूमिका
गांव में शुरू हुई वैकल्पिक शाला को सुचारू रूप से संचालित करने में स्थानीय शिक्षा दूत कोसा राम वड्डे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे गांव के बच्चों को नियमित पढ़ाई से जोड़ने और उनकी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होने से बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर जाने की मजबूरी से राहत मिली है। इससे अभिभावकों को भी अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर सहूलियत मिल रही है। अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों का स्कूल में नामांकन कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें नियमित शिक्षा से जोड़कर उनके भविष्य के लिए बेहतर अवसर तैयार करना भी है।
गांव में ही 22 बच्चों को मिले जाति प्रमाण पत्र
शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को जरूरी शासकीय दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रशासन ने पहल की है। वैकल्पिक प्राथमिक शाला घमंडी में पिछले वर्ष नामांकित 22 बच्चों के जाति प्रमाण पत्र तैयार कर हाल ही में वितरित किए गए। गांव में ही प्रमाण पत्र मिलने से बच्चों और उनके अभिभावकों को राहत मिली है। इन दस्तावेजों के उपलब्ध होने से बच्चों के लिए भविष्य में विभिन्न शासकीय छात्रवृत्तियों, शैक्षणिक योजनाओं और अन्य नागरिक सुविधाओं का लाभ लेने का रास्ता भी आसान होगा। इस पहल से स्पष्ट है कि प्रशासन दूरस्थ गांवों में शिक्षा के साथ-साथ जरूरी प्रशासनिक सुविधाएं भी पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
34 वैकल्पिक शालाओं से दूरस्थ क्षेत्रों में बढ़ेगी शिक्षा की पहुंच
‘स्कूल केईन्ता अभियान’ के तहत अब तक 2,000 से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है और दुर्गम क्षेत्रों में 34 वैकल्पिक प्राथमिक शालाओं का संचालन शुरू किया गया है। इन विद्यालयों के माध्यम से उन गांवों के बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, जहां दूरी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नियमित स्कूल जाना चुनौतीपूर्ण रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के साथ मिलकर यह पहल दूरस्थ अंचलों में शिक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने में योगदान दे रही है। जिला प्रशासन का यह प्रयास दर्शाता है कि स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर व्यवस्था तैयार करने से दुर्गम क्षेत्रों के बच्चों को भी शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।