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रायपुर, 6 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला, संस्कृति और पारंपरिक विधाओं को सहेजने तथा उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए समर्पित रायपुर के युवा लोककलाकार प्रांजल सिंह राजपूत के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का एक स्नेहिल पत्र असीम प्रेरणा लेकर आया है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रांजल की कला साधना, शिक्षा और 'भरथरी' लोकगायन के संरक्षण-संवर्धन के प्रयासों की सराहना किए जाने के बाद युवा कलाकार बेहद गदगद और भावुक हैं।
मुख्यमंत्री का पत्र प्राप्त होने पर अपनी खुशी साझा करते हुए प्रांजल सिंह ने कहा, "मुख्यमंत्री जी की पाती मिलना मेरे और मेरे परिवार के लिए बेहद भावुक और गौरव का क्षण है। उन्होंने न केवल मेरी कला को बल्कि मेरी शिक्षा को भी सराहा है। यह मेरे जीवन का एक अविस्मरणीय पल है, जो मुझे छत्तीसगढ़ी लोककला को और अधिक समर्पित भाव से आगे बढ़ाने की नई ऊर्जा देगा।"
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने पत्र में प्रांजल सिंह की बहुमुखी प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए उल्लेख किया है कि उन्होंने भौतिकी (Physics) में स्नातकोत्तर (Post Graduation) शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद लोकसंगीत की विभिन्न विधाओं को जीवंत रखा है। रेखा जलक्षत्री के मार्गदर्शन में भरथरी सीखने की उनकी यह कला यात्रा अब अन्य नवोदित साधकों तक भी पहुंच रही है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि प्रांजल अपनी भरथरी प्रस्तुतियों में गायन के साथ-साथ अभिनय और नृत्य को भी बखूबी स्थान देते हैं। इसके साथ ही, 'अहिल्या गाथा' की शानदार प्रस्तुति के जरिए उन्होंने लोकविधाओं में कई नए और रचनात्मक प्रयोग किए हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने युवा कलाकार द्वारा किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रांजल 'लोकगाथा भरथरी' के माध्यम से नए कलाकारों को पूरी तरह निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके अलावा, 'आकार' शिविर के जरिए बच्चों से लेकर वरिष्ठजनों तक को कला का ज्ञान बांट रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्राचीन लोकपरंपराओं के संरक्षण के आह्वान का जिक्र करते हुए प्रांजल को Gen Z पीढ़ी के उन होनहार युवाओं में शुमार किया, जिनके कंधों पर छत्तीसगढ़ की लोककलाओं की गौरवशाली यात्रा टिकी हुई है। मुख्यमंत्री ने प्रांजल के माता-पिता— कमलेश सिंह और ममता राजपूत को अभिवादन भेजते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।