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रायपुर, 2 अक्टूबर 2026। गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। इसी दौरान नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड की ग्राम पंचायत कच्चापाल से ग्रामीण भागीदारी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की तस्वीर सामने आई। कभी नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण एक पेड़ की छांव में एकत्र हुए और गांव के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
कच्चापाल की ग्राम सभा इसलिए भी खास रही क्योंकि बस्तर के जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की तथाकथित ‘जन अदालतों’ का भय बताया जाता था, उन्हीं क्षेत्रों में अब ग्रामीण संवैधानिक ग्राम सभा के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं। ग्रामीणों ने गांव की जरूरतों और विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा की। इस दौरान महिलाओं समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता की और स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़े विषय सामने रखे।
पेड़ की छांव में बनी लोकतांत्रिक संवाद की जगह
कच्चापाल में ग्राम सभा के लिए किसी बड़े सभागार की जरूरत नहीं पड़ी। ग्रामीण पेड़ के नीचे एकत्र हुए और सामूहिक रूप से गांव की आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों तथा विकास कार्यों पर चर्चा की। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी से ग्राम सभा में सक्रिय भागीदारी दिखाई दी।
प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों में भी विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को गांव की विकास प्राथमिकताएं तय करने की प्रक्रिया से जोड़ा गया। विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत विकसित ग्राम पंचायत प्लान यानी वीजीपीपी तैयार करने के लिए स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और जरूरी विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों से सुझाव लिए गए।
जल संरक्षण से रोजगार तक पर चर्चा
विशेष ग्राम सभाओं में जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्यों की स्थानीय जरूरत के अनुसार पहचान करने पर जोर दिया गया। रिफॉर्म उत्सव के तहत ग्रामीणों को 125 दिवस रोजगार की वैधानिक गारंटी, समय पर रोजगार और मजदूरी भुगतान तथा योजना के अंतर्गत अनुमेय 375 प्रकार के कार्यों की जानकारी भी दी गई।
ग्राम सभाओं से प्राप्त सुझावों को विकसित ग्राम पंचायत प्लान का आधार बनाया जाएगा। आगामी चरण में गांवों में उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय आवश्यकताओं का आकलन कर विकास योजना का प्रारूप तैयार किया जाएगा। इससे गांवों की जरूरत के अनुसार विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
कच्चापाल में दिखी बदलते बस्तर की तस्वीर
नारायणपुर के दूरस्थ कच्चापाल में पेड़ के नीचे आयोजित ग्राम सभा केवल एक बैठक तक सीमित नहीं रही। कभी नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे क्षेत्र में ग्रामीणों का बड़ी संख्या में एक साथ बैठकर संवैधानिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेना ग्रामीण भागीदारी की तस्वीर सामने लाता है। जहां कभी भय और हिंसा के बीच तथाकथित जन अदालतों की चर्चा होती थी, वहीं अब ग्रामीण ग्राम सभा के मंच पर अपनी जरूरतों और गांव के विकास को लेकर संवाद कर रहे हैं।