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बिलासपुर। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में बिलासपुर जिले में वसूली की धीमी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिले की मस्तूरी, बिल्हा, कोटा और तखतपुर तहसीलों में पूर्व सरपंचों और पंचायत सचिवों से संबंधित मामलों में 3.14 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की वसूली अब भी लंबित बताई जा रही है।
इन मामलों में कई प्रकरण वर्षों पुराने हैं और कुछ मामलों को करीब 20 साल तक का समय बीत चुका है। इसके बावजूद संबंधित मामलों में पूरी राशि की वसूली नहीं हो सकी है। लंबे समय से कार्रवाई लंबित रहने के कारण पंचायतों में सरकारी राशि के उपयोग और उसकी निगरानी को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पंचायत राज व्यवस्था में सरकारी राशि के गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों से राशि की वसूली के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। इसके बावजूद बिलासपुर जिले की चार तहसीलों में करोड़ों रुपये की वसूली लंबित रहने का मामला सामने आया है।
मस्तूरी, बिल्हा, कोटा और तखतपुर क्षेत्र के इन प्रकरणों में पूर्व सरपंचों और सचिवों पर विकास कार्यों से जुड़ी सरकारी राशि में अनियमितता या गबन के मामले सामने आए थे। कार्रवाई और वसूली की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण लंबित राशि का आंकड़ा अब 3.14 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
लंबे समय से लंबित इन मामलों में पूरी वसूली कब तक होगी और संबंधित प्रकरणों में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी, यह प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। वर्षों पुराने मामलों में वसूली की धीमी गति से सरकारी धन की सुरक्षा और पंचायत स्तर पर वित्तीय जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।