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रायपुर, 4 अक्टूबर 2026। नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ में बदलाव की एक नई तस्वीर सामने आई है। नारायणपुर जिले के भाटपाल में जिस परिसर में करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का कैंप संचालित होता रहा, आज उसी परिसर में दूरस्थ आदिवासी गांवों के बच्चे रहकर अपनी पढ़ाई और बेहतर भविष्य की तैयारी कर रहे हैं। बस्तर संभाग में अपनी तरह की इस पहली पहल के तहत पुराने सुरक्षा कैंप को जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास और शिक्षा से जुड़े केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।
कभी सुरक्षा और शांति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहे इस परिसर की भूमिका अब शिक्षा, अवसर और नई पीढ़ी के भविष्य निर्माण से जुड़ गई है। यह केवल पुराने भवन का उपयोग बदलने की पहल नहीं है, बल्कि बदलते अबूझमाड़ की तस्वीर भी सामने आती है, जहां विकास की प्राथमिकताएं सुरक्षा से आगे बढ़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आजीविका और नई पीढ़ी के लिए अवसर उपलब्ध कराने तक पहुंच रही हैं।
सुरक्षा कैंप से छात्रावास तक बदली परिसर की पहचान
नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर भाटपाल का यह परिसर लंबे समय तक सुरक्षा बलों का महत्वपूर्ण ठिकाना रहा। करीब 15 वर्षों तक यहां सुरक्षा बलों की तैनाती रही। परिस्थितियों में बदलाव के बाद परिसर खाली हुआ तो जिला प्रशासन ने इसे अनुपयोगी छोड़ने के बजाय विद्यार्थियों की शिक्षा से जोड़ने का निर्णय लिया।
कलेक्टर नम्रता जैन की पहल पर परिसर को उन जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास के रूप में विकसित किया गया, जो दूरस्थ और दुर्गम गांवों से पढ़ने आते हैं। लंबी दूरी और रहने की सुविधा नहीं होने के कारण इन विद्यार्थियों के लिए नियमित पढ़ाई जारी रखना चुनौतीपूर्ण था। 11 अगस्त 2026 से यहां विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था शुरू की गई।
एक परिसर में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को सुविधा
भाटपाल के पूर्व सुरक्षा कैंप परिसर में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं।
प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 100 सीटें स्वीकृत हैं। वर्तमान में यहां 114 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले इन बच्चों को विद्यालय के समीप सुरक्षित आवास मिलने से नियमित शिक्षा जारी रखने में सुविधा हो रही है।
इसी परिसर में पोस्ट-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास भी संचालित है। कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए यहां 50 सीटें स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में 39 विद्यार्थी निवासरत हैं। यह व्यवस्था एजुकेशन सिटी कुतुल से संबद्ध विद्यार्थियों की आवासीय जरूरत को भी पूरा कर रही है।
दसवीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए कई विद्यार्थियों को पहले विद्यालय के आसपास निजी आवास तलाशना पड़ता था, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ आता था। छात्रावास की सुविधा मिलने से अब विद्यार्थियों को सुरक्षित आवास के साथ पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण भी मिल रहा है।
स्कूल से सिर्फ 50 मीटर दूर है छात्रावास
दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों के लिए स्कूल में प्रवेश के साथ-साथ लंबी दूरी, परिवहन और रहने की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती होती है। भाटपाल में विकसित की गई नई व्यवस्था ने इस समस्या को काफी हद तक आसान किया है।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भाटपाल छात्रावास से महज 50 मीटर की दूरी पर है। इससे विद्यार्थियों को रोज लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ती और वे पढ़ाई के लिए अधिक समय दे पा रहे हैं। प्री-मैट्रिक से पोस्ट-मैट्रिक स्तर तक आवासीय सुविधा उपलब्ध होने से बच्चों की शिक्षा को निरंतर बनाए रखने में भी मदद मिल रही है।
बच्चों के अनुभव में दिख रहा बदलाव
हलामीमुंजमेटा के कक्षा 9वीं के विद्यार्थी रितेश सोनी बताते हैं कि नए परिसर में आने के बाद विद्यार्थी काफी खुश हैं। सुरक्षित वातावरण, स्कूल की नजदीकी और साथियों के साथ रहने व पढ़ाई करने की सुविधा उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है।
वहीं राजबेड़ा के कक्षा 12वीं के विद्यार्थी कोमेंद्र करीब 22 किलोमीटर दूर से आते हैं। छात्रावास शुरू होने से पहले उन्हें विद्यालय के पास अलग से रहने की व्यवस्था करनी पड़ती थी, जिससे परिवार पर अतिरिक्त खर्च आता था। अब छात्रावास में सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिलने से उनकी यह समस्या दूर हुई है।
कलेक्टर ने किया छात्रावास का निरीक्षण
कलेक्टर नम्रता जैन ने भाटपाल पहुंचकर छात्रावास का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों के कमरे, भोजन व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया तथा बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली।
उन्होंने विद्यार्थियों की जायज मांगों पर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। साथ ही बच्चों को छात्रावास परिसर और कमरों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण विद्यार्थियों को पढ़ाई पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
भोजन की गुणवत्ता और मीनू की भी जांच
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर छात्रावास के किचन में भी पहुंचीं और बच्चों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन का जायजा लिया। उन्होंने चावल और सब्जी की गुणवत्ता देखी तथा स्वच्छता बनाए रखने के साथ निर्धारित मीनू के अनुसार नाश्ता और भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सुरक्षा से शिक्षा तक पहुंचा भाटपाल
भाटपाल का यह परिवर्तन अबूझमाड़ और नारायणपुर की बदलती विकास यात्रा की तस्वीर प्रस्तुत करता है। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस अंचल में अब शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और दूरस्थ गांवों के बच्चों को उच्च कक्षाओं तक पढ़ाई जारी रखने के लिए आवासीय सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
भाटपाल में इसका स्वरूप खास तौर पर उल्लेखनीय है। जिस परिसर में कभी सुरक्षा बलों की गतिविधियां उसकी पहचान हुआ करती थीं, आज उसी परिसर में स्कूल यूनिफॉर्म पहने बच्चे किताबों के साथ अपने भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।
करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा का केंद्र रहा यह परिसर अब शिक्षा का सहारा बन गया है। सुरक्षा के लिए तैयार की गई अधोसंरचना आज नई पीढ़ी को अवसर देने के काम आ रही है। भाटपाल की यह कहानी बताती है कि अबूझमाड़ में बदलाव का अर्थ केवल सड़क, भवन और दूसरी अधोसंरचनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि दूरस्थ गांवों के बच्चों के लिए शिक्षा, सुरक्षित आवास और बेहतर भविष्य के नए रास्ते खोलना भी है।
जहां कभी सुरक्षा कैंप था, वहां आज बच्चों का छात्रावास है। जहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी परिसर की पहचान थी, वहां अब विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य के सपने नई पहचान बन रहे हैं। सुरक्षा से शिक्षा तक का यह सफर बदलते अबूझमाड़ की एक नई तस्वीर सामने रखता है।