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रायपुर, 5 अक्टूबर। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों की पेंशन बहाली को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा करीब चार दशकों से चली आ रही पेंशन और ग्रेच्युटी व्यवस्था को समाप्त किए जाने के निर्णय पर चिंता जताते हुए आदेश को वापस लेने और पूर्व व्यवस्था बहाल रखने का आग्रह किया है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पत्र में बताया कि प्रदेश के अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में वर्षों तक सेवाएं देने वाले प्राध्यापकों और कर्मचारियों को शासन की ओर से लगभग 40 वर्षों से पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ दिए जा रहे थे। विभागीय आदेश क्रमांक 38-2, दिनांक 12 अक्टूबर 2010 के तहत पांचवें वेतनमान के आधार पर यह सुविधा नियमित रूप से मिल रही थी।
हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग के नए आदेश क्रमांक 18649/2026/38-2, दिनांक 1 सितंबर 2026 के तहत इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। सांसद के अनुसार, पेंशन व्यवस्था बंद होने से सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
70 से 90 वर्ष की उम्र में पेंशन पर निर्भर हैं बुजुर्ग
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इन कर्मचारियों ने अपना पूरा जीवन प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में लगाया है। इनमें से अधिकांश पेंशनर 70 से 90 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं। इस उम्र में उनकी नियमित आजीविका, दैनिक खर्च और चिकित्सा संबंधी जरूरतें मुख्य रूप से पेंशन पर निर्भर हैं। ऐसे समय में पेंशन बंद होने से वरिष्ठ नागरिकों के सामने आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा की स्थिति पैदा हो सकती है।
आदेश वापस लेने और पेंशन जारी रखने का आग्रह
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से इस मामले पर मानवीय और जनहित के दृष्टिकोण से विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के आदेश को तत्काल निरस्त करने अथवा उस पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही पात्र सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों को पूर्व स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार पेंशन एवं ग्रेच्युटी का भुगतान जारी रखने का आग्रह किया है, ताकि इस उम्र में उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।