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बिलासपुर: चीतल के कथित शिकार और उसके मांस को गांव में बांटने के मामले का खुलासा एक बच्चे की बातचीत के दौरान हुआ। मामला बिलासपुर के मंजूरीपहरी गांव का बताया जा रहा है, जहां वन विभाग की टीम शिकायत के आधार पर जांच के लिए पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान एक बालक के जवाब ने टीम को उस घर तक पहुंचा दिया, जहां कड़ाही में चीतल का मांस पकाया जा रहा था।
जानकारी के अनुसार, चीतल के शिकार के बाद उसके मांस को गांव के कई घरों में बांटे जाने की शिकायत वन विभाग को मिली थी। इसी शिकायत पर टीम मंजूरीपहरी पहुंची। उस समय मौके पर कुत्ते के काटने से मृत एक अन्य चीतल के शव का पोस्टमार्टम चल रहा था। पोस्टमार्टम स्थल पर ग्रामीणों की भीड़ भी मौजूद थी।
बालक के जवाब से हुआ खुलासा
इसी दौरान वन विभाग की टीम ने एक बालक से गांव में चीतल के बारे में सामान्य पूछताछ की। बालक ने बताया कि गांव में हिरण अक्सर आते हैं और उनके मांस की सब्जी भी बनाई जाती है। जब टीम ने उससे पूछा कि क्या उसने कभी चीतल का मांस खाया है, तो बालक ने बताया कि उसी दिन उसके घर में इसकी सब्जी बनी है।
बालक की बात सुनने के बाद वन विभाग की टीम उसे लेकर उसके घर पहुंची। वहां जांच के दौरान कड़ाही में चीतल का मांस पकता हुआ मिला। इसके बाद टीम ने मामले की जानकारी जुटाते हुए पूछताछ शुरू की।
पूछताछ में सामने आया दूसरे ग्रामीण का नाम
पूछताछ के दौरान मामले में एक अन्य ग्रामीण का नाम भी सामने आया। वन विभाग ने दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि चीतल का शिकार कब और किस स्थान पर किया गया था तथा उसके मांस को किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया।
वन विभाग की कार्रवाई के बाद गांव में वन्यजीव शिकार को लेकर जांच तेज कर दी गई है। अधिकारियों द्वारा मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और संभावित लोगों की भूमिका की भी जानकारी जुटाई जा रही है।