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रायपुर, 13 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को भविष्य की जरूरतों, आर्थिक प्रगति और नागरिकों की सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने नई प्राथमिकताएं तय करने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क, भवन और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की जरूरतों, बढ़ती आबादी, औद्योगिक गतिविधियों और बदलती तकनीक के अनुरूप किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाबद्ध पूंजीगत निवेश से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलनी चाहिए और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘अंजोर विजन 2047’ के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। इसके लिए पूंजीगत व्यय करने वाले सभी विभागों को स्पष्ट प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक कार्ययोजना के साथ काम करना होगा। अधोसंरचना पर किया जाने वाला खर्च केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के भविष्य में निवेश है। इसलिए परियोजनाओं का चयन करते समय उनके आर्थिक और सामाजिक प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिए। यह भी देखा जाए कि किसी परियोजना से आवागमन, उद्योग, व्यापार, कृषि, पर्यटन, रोजगार और नागरिक सुविधाओं को कितना लाभ मिलेगा।
बजट से निर्माण तक प्रत्येक चरण की समय-सीमा तय करने के निर्देश
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी परियोजना के लिए बजट स्वीकृत हो जाना ही पर्याप्त नहीं है। परियोजना को समय पर पूरा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि देरी से निर्माण लागत बढ़ती है और जनता को मिलने वाला लाभ भी टल जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना की अवधारणा और योजना तैयार करने से लेकर बजट प्रावधान, प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश और निर्माण पूरा होने तक प्रत्येक चरण की स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए। सभी स्तरों पर नियमित समीक्षा हो और देरी के कारणों का समय रहते समाधान किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित तकनीकी एवं सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए निर्माण गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
दो लेन और चार लेन सड़कों के लिए होगा विस्तृत सर्वे
प्रदेश में सड़क नेटवर्क के दीर्घकालिक विकास पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यातायात की मौजूदा स्थिति, बढ़ती आबादी, औद्योगिक विकास, नए आर्थिक केंद्रों और भविष्य में संभावित यातायात दबाव का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में किन मार्गों को दो लेन और किन्हें चार लेन में विकसित करने की आवश्यकता है, इसके लिए व्यापक सर्वे कराया जाए। सर्वे के आधार पर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सड़क नेटवर्क का मास्टर प्लान तैयार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से केवल यात्रा आसान नहीं होती, बल्कि बाजारों तक पहुंच बढ़ती है, व्यापार और उद्योग को गति मिलती है तथा कृषि उत्पादों के परिवहन में भी सुविधा होती है। इससे नए क्षेत्रों में निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों, शहरों, औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच बेहतर एवं निर्बाध कनेक्टिविटी विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
निर्माण के साथ रखरखाव को भी मिले समान प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने सड़कों, भवनों और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों के नियमित रखरखाव के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक अधोसंरचना के निर्माण पर बड़ी राशि खर्च होती है। यदि समय पर रखरखाव नहीं किया जाए, तो छोटी खराबियां गंभीर रूप ले सकती हैं और मरम्मत पर अधिक खर्च करना पड़ता है। इसलिए परियोजना की योजना बनाते समय ही उसके दीर्घकालिक रखरखाव की व्यवस्था तय की जाए। नियमित निरीक्षण और समयबद्ध मरम्मत की स्पष्ट कार्यप्रणाली बनाई जाए, जिससे परिसंपत्तियों की कार्यशील आयु बढ़े, सरकारी संसाधनों की बचत हो और नागरिकों को लगातार बेहतर सुविधाएं मिलती रहें।
स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक भवनों की डिजाइन में भविष्य का ध्यान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्कूलों, कॉलेजों और अन्य सार्वजनिक भवनों की डिजाइन तैयार करते समय केवल वर्तमान जरूरतों को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों और अन्य उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने तथा नई सुविधाओं की आवश्यकता को भी ध्यान में रखा जाए। भवनों की प्रारंभिक योजना में भविष्य के विस्तार, सुरक्षा, सुगम पहुंच, उपयोगिता और रखरखाव से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जाए। इससे भविष्य में अतिरिक्त निर्माण पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करने और उपलब्ध परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी।
आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बेहतर कार्यप्रणालियों पर जोर
मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण निर्माण सामग्री और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अधिकाधिक उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को देश के अन्य राज्यों में अधोसंरचना निर्माण एवं रखरखाव के क्षेत्र में अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों, नवाचारों और सफल नीतियों का अध्ययन करने के निर्देश दिए। उपयोगी नवाचारों को छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आर्थिक और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप लागू करने पर भी बल दिया गया।
उन्होंने कहा कि निर्माण तकनीक में लगातार बदलाव हो रहे हैं, इसलिए इंजीनियरों और तकनीकी अधिकारियों को नवीनतम तकनीकों से परिचित कराना जरूरी है। इसके लिए नियमित प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन की संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाए। अधोसंरचना को टिकाऊ बनाने, जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने और गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
योजना से रखरखाव तक विकसित होगी एकीकृत डिजिटल व्यवस्था
बैठक में मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन की प्रस्तावित कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। मिशन के माध्यम से सार्वजनिक अधोसंरचना की योजना, वित्तपोषण, स्वीकृति, खरीद एवं ठेका प्रक्रिया, निर्माण, निगरानी और रखरखाव की व्यवस्थाओं में सुधार लाने की दिशा में काम किया जाएगा। विभिन्न विभागों की प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की योजना पर भी विचार किया गया, जिससे परियोजनाओं की भौतिक और वित्तीय प्रगति तथा निर्धारित समय-सीमा की प्रभावी निगरानी की जा सके।
प्रदेश में उपलब्ध अधोसंरचना का समग्र आकलन कर उसकी आवश्यकता और उपलब्धता के बीच अंतर की पहचान भी की जाएगी। इससे वास्तविक जरूरतों के आधार पर परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने और वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग अलग-अलग दृष्टिकोण से काम करने के बजाय प्रदेश की साझा विकास जरूरतों को ध्यान में रखकर समन्वित प्रयास करें। इससे एक ही क्षेत्र में कार्यों की अनावश्यक पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी और परियोजनाओं को एक-दूसरे का पूरक बनाया जा सकेगा।
नागरिकों को मिलने वाला लाभ ही विकास की सफलता का आधार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अधोसंरचना विकास की सफलता का आकलन केवल बनी सड़कों की लंबाई या निर्मित भवनों की संख्या से नहीं होना चाहिए। यह देखना जरूरी है कि इन सुविधाओं से नागरिकों का जीवन कितना आसान हुआ, आर्थिक गतिविधियों में कितनी वृद्धि हुई, कितने नए अवसर पैदा हुए और संबंधित क्षेत्रों के दीर्घकालिक विकास को कितनी गति मिली। उन्होंने कहा कि ऐसी अधोसंरचना तैयार करना लक्ष्य है, जो वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपयोगी साबित हो। योजनाबद्ध पूंजीगत निवेश, आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण निर्माण और नियमित रखरखाव के माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव तैयार की जाएगी। उन्होंने शासन की जनहितकारी विकास योजनाओं और नई अधोसंरचना से नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दिया।
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत और पी. दयानंद, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश बंसल, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।